Log In

 

Company Name : Management Development Institute

Wednesday, January 31, 2018 8:50PM IST (3:20PM GMT)

देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इंतजार: प्रोफेसर. अवनीश, एमडीआई


#शिक्षा को सुलभ, सस्ता और लोगों की पहुंच तक लाया जाएगा और क्षेत्रीय असमानता होगी खत्म


Gurugram, Haryana, India

स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदों की शिक्षाओं की पृष्ठभूमि में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनएमपी) की नींव रखी गई है। महात्मा गांधी ने विशालकाय पॉलिसी का एजेंडा तैयार किया था। शिक्षा के प्रभाव का दायरा व्यक्ति के अच्छे रहन-सहन से लेकर राष्ट्रीय विकास तक फैला है। अगर यह शिक्षा नीति 28 करोड़ 20 लाख की अनपढ़ आबादी को उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल करने की रणनीति बना ले तो नई शिक्षा नीति में विकास की गति और पैटर्न में बदलाव लाने की क्षमता है। नई शिक्षा नीति में मौजूदा अनपढ़ आबादी के अलावा दो विस्तृत श्रेणियों, स्कूल और हायर एजुकेशन में भी विशेष ध्यान देने और गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है। स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले छात्र और बेरोजगार आबादी से हमें यह संकेत मिलता है कि स्कूली बच्चों को प्रोत्साहित करने और शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग करने में हम असफल रहे हैं, जबकि हायर एजुकेशन में अभी नए और अभिनव प्रयोग होने हैं। हायर एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए नई शिक्षा नीति में विद्वान शिक्षाविदों को शामिल करना बहुत जरूरी है। इन दो चुनौतियों से मुकाबला करना मुश्किल तो है, मगर असंभव नहीं है।

> <
  • AvanishAvanish Kumar
 
एनएमपी की 9 सदस्यीय कमिटी की ओर से नई शिक्षा नीति को अप्रैल तक अंतिम रूप देने की संभावना है। एनएमपी से पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था में दो मूलभूत बदलाव आए थे। 1976 में शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया और 2009 के आईटीई (राइट टु एजुकेशन) अधिनियम ने 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा देना अनिवार्य बना दिया।

नई शिक्षा नीति के गठन में भागीदारी की प्रक्रिया अपनाई गई है। भागीदारी की प्रक्रिया से हानि की जगह लाभ ज्यादा है। इसमें ज्ञान और विचारों का आदान-प्रदान होता है, लेकिन काम समाप्त होने और किसी बात पर सहमति बनने में काफी देर लगती है। एनएमपी ने इस क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों को पहचाना है, जिसमें सभी लोगों तक शिक्षा की पहुंच का दायरा बढ़ाना, भागीदारी, कौशल विकास, रोजगार, सिलेबस  और आकलन की प्रक्रिया प्रमुख है।

हालांकि शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियां काफी है, लेकिन शिक्षा के गिरते स्तर की जड़ में खासतौर से स्कूलों में शिक्षकों की प्रतिष्ठा में कमी आना मुख्य कारण है। अगर शिक्षकों का स्तर गिरेगा तो समाज में शिक्षा का उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सकता। सच तो यह है कि पिछले 50 सालों में भारत के स्कूलों में टीचरों की स्थिति काफी बिगड़ी है।

एमएमपी का व्यापक दृष्टिकोण जटिल और काफी धुंधला है। देश के अधिकंश लोगों को साक्षर बनाने के लिए शिक्षा नीति को बेस्ट से भी ज्यादा होना चाहिए। विश्वसनीयता के अलावा शिक्षा की ऊंची लागत की वजह से छात्र अच्छी पढ़ाई नहीं कर पाते और अपने में रोजगार के लायक स्किल विकसित नहीं कर पाते। अच्छे टेक्निकल इंस्टिट्यूशन से इंजीनियरिंग की डिग्री निकलने वाले 0.8 मिलियन इंजीनियरों में से 60 फीसदी से ज्यादा इंजीनियर बेरोजगार क्यों रहते है। यह सवाल भी पूछना स्वाभाविक हो जाता है कि जिस जगह, नालंदा में विश्व की पहली यूनिवर्सिटी बनी, उसी नालंदा में 47 फीसदी महिलाएं और 25 फीसदी पुरुष निरक्षर क्यों हैं।

शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और फैकल्टी के विकास के लिए नेशनल टीचर एजुकेशन यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई।  स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने के लिए नई शिक्षा नीति में एनसीईआरटी में आमूलचूल बदलाव की बात स्वीकारी गई है।

नई शिक्षा नीति में साइंस, मैथ्स और इंग्लिश को कॉमन नेशनल करिकुलम के रूप में पहचाना गया है। छठी क्लास से बच्चों को लैब के माध्यम से साइंस के प्रयोग करने की अनुमति देना वास्तव में अच्छा आइडिया है। युवा छात्रों को टीचिंग करियर की ओर आकर्षित करने के लिए एम. फिल और पीएचडी के छात्रो को अकेडेमिक एसोसिएट्स और अकेडेमिक असिस्टेंट्स का दर्जा देना भी नई पहल में शामिल है। नई शिक्षा नीति के तहत ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री भी भारत में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को मिल सके। नई शिक्षा नीति श्री अरबिंदो के सपनों को साकार करने की दिशा में एक शानदार कदम है।


Click here for Media Contact Details

Manoj Sharma, Goldmine Advertising, +91-9810645307, manojsharma76us@yahoo.com


More News from Management Development Institute

26/03/2018 1:56PM Image

Industry Stalwart Shri G M Rao shares 'Mantra of Success' with Future Champions of Industry at MDI Gurgaon Annual Convocation 2018

India's premier B School, Management Development Institute (MDI) Gurgaon, held its annual convocation on March 24, 2018. It was an occasion to celebrate and honour the successful journey of its students who are ready to ...

05/02/2018 6:21PM Image

Dr. Himadri Das has joined as the New Director of MDI, Gurgaon

Dr. Himadri Das has joined as the Director, MDI Gurugram. He took over from Prof. C. P. Shrimali, Acting Director, MDI.

Similar News

25/05/2018 6:00PM

Hisense's Zhou Houjian and Huawei's Kevin Ho to Keynote CES Asia; Focus on Mobility, 5G and Connectivity

The Consumer Technology AssociationTM (CTA) today announced that Hisense Chairman Zhou Houjian and Huawei’s president of Handset Product Line Kevin Ho will deliver separate keynote addresses at the upcoming ...

No Image

25/05/2018 5:50PM

Andersen Global’s Middle East Expansion Continues with Solutions Bridge in Kuwait

Solutions Bridge, an Accounting and Corporate Secretarial Services firm in Kuwait City, has signed a Collaboration Agreement with Andersen Global. The addition of a location in Kuwait demonstrates Andersen ...